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Jeevan ki kitab Hindi Kavita

जीवन की किताब हिंदी कविता



बिखरें हुए है पन्ने,जीवन किताब है,
किस किस को मैं समेटु मेरे रिश्ते खराब है
टूट रहे जो आज पत्ते शांख से दरख़्त की,
एक अरसे से टूटने को सब बड़े बेताब है।


@साहित्य गौरव


उजड़ रही है धीरे धीरे खुद खुदकी जिंदगी,
कर रहा तबाह जो सब कुछ कैसा सैलाब है।
...किस किस को मैं समेटु मेरे रिश्ते खराब है।



ऐसा नहीं कि कोशिश कोई की नही मैने,
लिखा हुआ जो किस्मत में ये वही अजाब है।

बदल जाते है जो लोग अक्सर वक्त के साथ साथ
बदलाव ही तो जीवन है यही उसका हिसाब है।
...किस किस को मैं समेटु मेरे रिश्ते खराब है
@साहित्य गौरव


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किताब 

पढ़ना है तो पढ़िए,जरा बेताब से पढ़िए।
जो आसानी से आए समझ जीवन किताब से पढ़िए।
पढ़ना और समझना बडा फर्क है दोनो में।
मेरी भाषा को समझिए, मुझे हिसाब से पढ़िए।
@साहित्य गौरव


हमें उम्मीद है कि आपको हिंदी कविताओं के बारे में हमारा लेख पसंद आया होगा। इस ज्ञान के साथ, हम जानते हैं कि जब आपके पास समय हो तो आप हिंदी कविता पढ़ने का आनंद लें सकते हैं। तो आप किसका इंतजार कर रहे हैं? आज ही कुछ लोकप्रिय हिंदी कविताएँ देखें!

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